बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा।।
मूल पाठ
नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा।।
तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं। बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं।।
स्रोत अभिलेख 1.322 · पुस्तक पृ. 303, 303
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रेष्ठ देवाङ्गनाएँ, जो सुन्दर मनुष्य-स्त्रियोंके वेषमें हैं, सभी स्वभावसे ही सुन्दरी और श्यामा (सोलह वर्षकी अवस्थावाली) हैं। उनको देखकर रनिवासकी स्त्रियाँ सुख पाती हैं और बिना पहचानके ही वे सबको प्राणोंसे भी प्यारी हो रही हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 303 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा।।
English explanation
The noble celestial women who had assumed the guise of human women were all naturally beautiful and youthful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारि | मानवी स्त्री के | of a human woman |
| बेष | वेश में | in the guise |
| जे | जो | who |
| सुर | देवताओं की; दिव्य | celestial |
| बर | श्रेष्ठ | excellent; noble |
| बामा | स्त्रियाँ | women |
| सकल | सब | all |
| सुभायँ | स्वभावतः | by nature |
| सुंदरी | सुंदर | beautiful |
| स्यामा | युवती | youthful women |
2 तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं। बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं।।
English explanation
The women felt joy on seeing them. Even without recognizing who they truly were, they found them dearer than life itself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्हहि | उन देवांगनाओं को | those celestial women |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सुखु | सुख | joy |
| पावहिं | पाती हैं | experience |
| नारीं | स्त्रियाँ | the women |
| बिनु | बिना | without |
| पहिचानि | असली परिचय जाने | recognizing their true identity |
| प्रानहु | प्राणों से भी | even their own lives |
| ते | से | than |
| प्यारीं | अधिक प्रिय | dearer |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.322
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 303
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 303, 303
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।