बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार सनमानहिं रानी। उमा रमा सारद सम जानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउन्हें पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वतीके समान जानकर रानी बार-बार उनका सम्मान करती हैं। [रनिवासकी स्त्रियाँ और सखियाँ] सीताजीका शृंगार करके, मण्डली बनाकर, प्रसन्न होकर उन्हें मण्डपमें लिवा चलीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 303 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बार बार सनमानहिं रानी। उमा रमा सारद सम जानी।।
सीय सँवारि समाजु बनाई। मुदित मंडपहिं चलीं लवाई।।
स्रोत अभिलेख 1.322 · पुस्तक पृ. 303, 303
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बार बार सनमानहिं रानी। उमा रमा सारद सम जानी।।
English explanation
The queen repeatedly honored them, regarding them as equal to Uma, Lakshmi, and Saraswati.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर-फिर | after time; repeatedly |
| सनमानहिं | सम्मान करती हैं | honors |
| रानी | रानी | the queen |
| उमा | देवी पार्वती | the goddess Parvati |
| रमा | देवी लक्ष्मी | the goddess Lakshmi |
| सारद | देवी सरस्वती | the goddess Saraswati |
| सम | के समान | equal to |
| जानी | मानकर | regarding them as |
2 सीय सँवारि समाजु बनाई। मुदित मंडपहिं चलीं लवाई।।
English explanation
Having adorned Sita and arranged the accompanying group, they joyfully set out, taking her to the wedding pavilion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता को | Sita |
| सँवारि | सजाकर | having adorned |
| समाजु | साथ चलने वाला समूह | the accompanying company |
| बनाई | व्यवस्थित करके | having arranged |
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| मंडपहिं | विवाह-मंडप की ओर | to the wedding pavilion |
| चलीं | चल पड़ीं | set out |
| लवाई | सीता को साथ लेकर | taking Sita along |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.322
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 303
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 303, 303
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।