बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नारद बचन सगर्भ सहेतू। सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू।।
मूल पाठ
नारद बचन सगर्भ सहेतू। सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू।।
अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका। सबहि भाँति संकरु अकलंका।।
स्रोत अभिलेख 1.72 · पुस्तक पृ. 89, 89
भावार्थ
मूल पाठ के बादनारदजीके वचन रहस्यसे युक्त और सकारण हैं और शिवजी समस्त सुन्दर गुणोंके भण्डार हैं। यह विचारकर तुम [मिथ्या] सन्देहको छोड़ दो। शिवजी सभी तरहसे निष्कलङ्क हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 89 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नारद बचन सगर्भ सहेतू। सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू।।
English explanation
Narada’s words carry a deeper meaning and a reason; Shiva, whose banner bears a bull, is beautiful and a treasury of all virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद के | of the divine sage Narada |
| बचन | वचन | words |
| सगर्भ | गूढ़ अर्थयुक्त | laden with deeper meaning |
| सहेतू | कारणयुक्त | with a reason |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| सब | सभी | all |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| निधि | भंडार | treasury |
| बृषकेतू | वृषध्वज शिव | Shiva, with the bull-banner |
2 अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका। सबहि भाँति संकरु अकलंका।।
English explanation
Considering this, abandon your apprehension; Shiva is without blemish in every respect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| तुम्ह | तुम | you |
| तजहु | छोड़ दो | abandon |
| असंका | आशंका | apprehension |
| सबहि | हर | every |
| भाँति | प्रकार से | in respect |
| संकरु | शंकर, शिव | Shiva |
| अकलंका | निष्कलंक | without blemish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 89
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 89, 89
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।