बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि पति बचन हरषि मन माहीं। गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपतिके वचन सुन मनमें प्रसन्न होकर मैना उठकर तुरंत पार्वतीके पास गयीं। पार्वतीको देखकर उनकी आँखोंमें आँसू भर आये। उसे स्नेहके साथ गोदमें बैठा लिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 89 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि पति बचन हरषि मन माहीं। गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं।।
उमहि बिलोकि नयन भरे बारी। सहित सनेह गोद बैठारी।।
स्रोत अभिलेख 1.72 · पुस्तक पृ. 89, 89
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि पति बचन हरषि मन माहीं। गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं।।
English explanation
Hearing her husband’s words, Maina rejoiced inwardly and immediately rose and went to Girija.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| पति | पति के | her husband’s |
| बचन | वचन | words |
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | within |
| गई | गईं | she went |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| उठि | उठकर | having risen |
| गिरिजा | पर्वतपुत्री पार्वती के | of Parvati, the mountain’s daughter |
| पाहीं | पास | to the side |
2 उमहि बिलोकि नयन भरे बारी। सहित सनेह गोद बैठारी।।
English explanation
Seeing Uma, her eyes filled with tears; she lovingly seated Uma in her lap.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमहि | उमा को | Uma, Parvati |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| नयन | आँखें | eyes |
| भरे | भर गईं | filled |
| बारी | आँसुओं से | with tears |
| सहित | सहित | with |
| सनेह | स्नेह | affection |
| गोद | गोद में | in her lap |
| बैठारी | बैठाया | seated her |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 89
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 89, 89
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