बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बारहिं बार लेति उर लाई। गदगद कंठ न कछु कहि जाई।।
मूल पाठ
बारहिं बार लेति उर लाई। गदगद कंठ न कछु कहि जाई।।
जगत मातु सर्बग्य भवानी। मातु सुखद बोलीं मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.72 · पुस्तक पृ. 89, 89
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर बार-बार उसे हृदयसे लगाने लगीं। प्रेमसे मैनाका गला भर आया, कुछ कहा नहीं जाता। जगज्जननी भवानीजी तो सर्वज्ञ ठहरीं। [माताके मनकी दशाको जानकर] वे माताको सुख देनेवाली कोमल वाणीसे बोलीं—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 89 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बारहिं बार लेति उर लाई। गदगद कंठ न कछु कहि जाई।।
English explanation
Again and again she clasped Uma to her heart; her throat choked with emotion, and she could say nothing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारहिं | बार-बार के भाव में: बार ही | time after time |
| बार | बार | time |
| लेति | लेती थीं | she would take |
| उर | हृदय से | to her heart |
| लाई | लगाकर | clasping |
| गदगद | भावावेश से रुँधा | choked with emotion |
| कंठ | गला | throat |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ | anything |
| कहि | कहा | spoken |
| जाई | जा सकता था | could be |
2 जगत मातु सर्बग्य भवानी। मातु सुखद बोलीं मृदु बानी।।
English explanation
Bhavani, the omniscient Mother of the world, spoke gentle words that comforted her mother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगत | जगत की | of the world |
| मातु | माता | Mother |
| सर्बग्य | सब जानने वाली | omniscient |
| भवानी | भवानी, पार्वती | Bhavani, Parvati |
| मातु | अपनी माता को | to her mother |
| सुखद | सुख देने वाली | comforting |
| बोलीं | बोलीं | spoke |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.72
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 89
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 89, 89
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