बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ जानि अस आयसु होऊ। कौतुकु करौं बिलोकिअ सोऊ।।
मूल पाठ
नाथ जानि अस आयसु होऊ। कौतुकु करौं बिलोकिअ सोऊ।।
कमल नाल जिमि चाफ चढ़ावौं। जोजन सत प्रमान लै धावौं।।
स्रोत अभिलेख 1.253 · पुस्तक पृ. 245, 246
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा जानकर हे नाथ! आज्ञा हो तो कुछ खेल करूँ, उसे भी देखिये। धनुषको कमलकी डंडीकी तरह चढ़ाकर उसे सौ योजनतक दौड़ा लिये चला जाऊँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 246 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाथ जानि अस आयसु होऊ। कौतुकु करौं बिलोकिअ सोऊ।।
English explanation
My lord, knowing this, give your command; let me perform this feat, and watch it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| जानि | जानकर | knowing |
| अस | ऐसा | this |
| आयसु | आज्ञा | command |
| होऊ | हो | let there be |
| कौतुकु | आश्चर्यजनक खेल | a wondrous feat |
| करौं | मैं करूँ | let me perform |
| बिलोकिअ | आप देखिए | please watch |
| सोऊ | उसी को | that very feat |
2 कमल नाल जिमि चाफ चढ़ावौं। जोजन सत प्रमान लै धावौं।।
English explanation
I could string the bow as easily as a lotus stalk and run with it for a hundred yojanas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कमल | कमल की | of a lotus |
| नाल | डंडी | stalk |
| जिमि | की तरह | like |
| चाफ | धनुष | bow |
| चढ़ावौं | मैं प्रत्यंचा चढ़ाऊँ | I could string |
| जोजन | योजन | yojanas |
| सत | सौ | one hundred |
| प्रमान | की दूरी तक | over a distance of |
| लै | लेकर | taking it |
| धावौं | मैं दौड़ूँ | I could run |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.253
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 246
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 245, 246
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।