बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ कृपाँ अब गयउ बिषादा। सुखी भयउँ प्रभु चरन प्रसादा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे नाथ! आपकी कृपासे अब मेरा विषाद जाता रहा और आपके चरणोंके अनुग्रहसे मैं सुखी हो गयी। यद्यपि मैं स्त्री होनेके कारण स्वभावसे ही मूर्ख और ज्ञानहीन हूँ, तो भी अब आप मुझे अपनी दासी जानकर—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 132 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नाथ कृपाँ अब गयउ बिषादा। सुखी भयउँ प्रभु चरन प्रसादा।।
अब मोहि आपनि किंकरि जानी। जदपि सहज जड नारि अयानी।।
स्रोत अभिलेख 1.12 · पुस्तक पृ. 131, 133
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाथ कृपाँ अब गयउ बिषादा। सुखी भयउँ प्रभु चरन प्रसादा।।
English explanation
Lord, through your grace my sorrow has now departed; by the grace of your feet, I have become happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| कृपाँ | आपकी कृपा से | through your grace |
| अब | अब | now |
| गयउ | चला गया | has departed |
| बिषादा | विषाद | sorrow |
| सुखी | सुखी | happy |
| भयउँ | मैं हो गई | I have become |
| प्रभु | हे प्रभु | O lord |
| चरन | आपके चरणों के | of your feet |
| प्रसादा | अनुग्रह से | through grace |
2 अब मोहि आपनि किंकरि जानी। जदपि सहज जड नारि अयानी।।
English explanation
Now regard me as your servant, although I am by nature a dull and unknowing woman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| मोहि | मुझे | me |
| आपनि | अपनी | your own |
| किंकरि | सेविका | female servant |
| जानी | समझकर; मानिए | regarding; consider |
| जदपि | यद्यपि | although |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| जड | जड़बुद्धि | dull-witted |
| नारि | स्त्री | woman |
| अयानी | नासमझ | unknowing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 132
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद · अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 131, 133
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।