बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी।।
मूल पाठ
ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी।।
तुम्ह कृपाल सबु संसउ हरेऊ। राम स्वरुप जानि मोहि परेऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.12 · पुस्तक पृ. 131, 133
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपकी चन्द्रमाकी किरणोंके समान शीतल वाणी सुनकर मेरा अज्ञानरूपी शरद् ऋतु (क्वार) की धूपका भारी ताप मिट गया। हे कृपालु! आपने मेरा सब सन्देह हर लिया, अब श्रीरामचन्द्रजीका यथार्थ स्वरूप मेरी समझमें आ गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 131 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी।।
English explanation
AI draft: Hearing your words, like moonbeams, dispelled the intense autumn heat of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| कर | किरणें | rays |
| सम | के समान | like |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| गिरा | वाणी | words; speech |
| तुम्हारी | आपकी | your |
| मिटा | मिट गया | was dispelled |
| मोह | मोह रूपी | in the form of delusion |
| सरदातप | शरद ऋतु का ताप | autumn heat |
| भारी | तीव्र | intense |
2 तुम्ह कृपाल सबु संसउ हरेऊ। राम स्वरुप जानि मोहि परेऊ।।
English explanation
You are compassionate and have removed all doubt. I have come to understand Rama’s true nature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| सबु | सारा | all |
| संसउ | संशय | doubt |
| हरेऊ | दूर कर दिया | have removed |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| स्वरुप | वास्तविक स्वरूप | true nature |
| जानि | समझ में | into understanding |
| मोहि | मुझे | to me |
| परेऊ | आ गया | has become clear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 131
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद · अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 131, 133
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।