बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रथम जो मैं पूछा सोइ कहहू। जौं मो पर प्रसन्न प्रभु अहहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे प्रभो! यदि आप मुझपर प्रसन्न हैं तो जो बात मैंने पहले आपसे पूछी थी, वही कहिये। [यह सत्य है कि ] श्रीरामचन्द्रजी ब्रह्म हैं, चिन्मय (ज्ञानस्वरूप) हैं, अविनाशी हैं, सबसे रहित और सबके हृदयरूपी नगरीमें निवास करनेवाले हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 132 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रथम जो मैं पूछा सोइ कहहू। जौं मो पर प्रसन्न प्रभु अहहू।।
राम ब्रह्म चिनमय अबिनासी। सर्ब रहित सब उर पुर बासी।।
स्रोत अभिलेख 1.12 · पुस्तक पृ. 131, 133
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रथम जो मैं पूछा सोइ कहहू। जौं मो पर प्रसन्न प्रभु अहहू।।
English explanation
Lord, if you are pleased with me, answer the question I asked earlier.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहले | earlier |
| जो | जो बात | what |
| मैं | मैंने | I |
| पूछा | पूछी थी | asked |
| सोइ | उसी को | that very thing |
| कहहू | बताइए | please explain |
| जौं | यदि | if |
| मो | मुझ | me |
| पर | पर | with |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| प्रभु | हे प्रभु | O lord |
| अहहू | आप हैं | you are |
2 राम ब्रह्म चिनमय अबिनासी। सर्ब रहित सब उर पुर बासी।।
English explanation
Rama is Brahman, pure consciousness and imperishable; beyond all, he dwells in the heart-city of everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| ब्रह्म | परम सत्य ब्रह्म | Brahman, the absolute reality |
| चिनमय | चेतनास्वरूप | consisting of pure consciousness |
| अबिनासी | अविनाशी | imperishable |
| सर्ब | सबसे | from all |
| रहित | रहित; परे | free; beyond |
| सब | सबके | everyone’s |
| उर | हृदय | heart |
| पुर | रूपी नगर | as a city |
| बासी | में रहने वाले | dwelling in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 132
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद · अवतारके हेतु
- मुद्रित पृष्ठ
- 131, 133
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।