बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नव अबुंज अंबक छबि नीकी। चितवनि ललित भावँती जी की।।
मूल पाठ
नव अबुंज अंबक छबि नीकी। चितवनि ललित भावँती जी की।।
भुकुटि मनोज चाप छबि हारी। तिलक ललाट पटल दुतिकारी।।
स्रोत अभिलेख 1.147 · पुस्तक पृ. 154, 154
भावार्थ
मूल पाठ के बादनेत्रोंकी छबि नये [खिले हुए] कमलके समान बड़ी सुन्दर थी। मनोहर चितवन जीको बहुत प्यारी लगती थी। टेढ़ी भौंहें कामदेवके धनुषकी शोभाको हरनेवाली थीं। ललाटपटलपर प्रकाशमय तिलक था॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 154 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नव अबुंज अंबक छबि नीकी। चितवनि ललित भावँती जी की।।
English explanation
The eyes, like freshly blooming lotuses, have a lovely beauty; the gaze is graceful and pleasing to the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नव | नया खिला | freshly blooming |
| अबुंज | कमल जैसा | lotus-like |
| अंबक | नेत्र | eyes |
| छबि | सुंदरता | beauty |
| नीकी | सुंदर; मनोहर | lovely |
| चितवनि | चितवन; देखने की मुद्रा | gaze |
| ललित | सुंदर और कोमल | graceful |
| भावँती | भाने वाली | pleasing |
| जी | मन | heart; mind |
| की | को; ‘जी की भावँती’ में संबंध-सूचक | to, in ‘pleasing to the heart’ |
2 भुकुटि मनोज चाप छबि हारी। तिलक ललाट पटल दुतिकारी।।
English explanation
The brows surpass the beauty of the god of love’s bow; the forehead mark lends radiance to the expanse of the brow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुकुटि | भौंहें | eyebrows |
| मनोज | कामदेव के | of the god of love |
| चाप | धनुष की | of the bow |
| छबि | सुंदरता | beauty |
| हारी | को मात देने वाली | surpassing |
| तिलक | माथे का तिलक | forehead mark |
| ललाट | माथे के | of the forehead |
| पटल | विस्तार को | the expanse |
| दुतिकारी | चमकाने वाला | making radiant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.147
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 154
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 154, 154
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।