बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नयनन्हि संत दरस नहिं देखा। लोचन मोरपंख कर लेखा।।
मूल पाठ
नयनन्हि संत दरस नहिं देखा। लोचन मोरपंख कर लेखा।।
ते सिर कटु तुंबरि समतूला। जे न नमत हरि गुर पद मूला।।
स्रोत अभिलेख 1.113 · पुस्तक पृ. 126, 126
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन्होंने अपने नेत्रोंसे संतोंके दर्शन नहीं किये, उनके वे नेत्र मोरके पंखोंपर दीखनेवाली नकली आँखोंकी गिनतीमें हैं। वे सिर कड़वी तूँबीके समान हैं, जो श्रीहरि और गुरुके चरणतलपर नहीं झुकते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 126 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नयनन्हि संत दरस नहिं देखा। लोचन मोरपंख कर लेखा।।
English explanation
Eyes that have not beheld saints are like the eye-shaped markings on peacock feathers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नयनन्हि | आँखों से | with the eyes |
| संत | संतों का | of saints |
| दरस | दर्शन | sight |
| नहिं | नहीं | not |
| देखा | देखा | beheld |
| लोचन | आँखें | eyes |
| मोरपंख | मोरपंख की आँख-जैसी आकृतियों | eye-shaped markings on peacock feathers |
| कर | के | of |
| लेखा | समान | like |
2 ते सिर कटु तुंबरि समतूला। जे न नमत हरि गुर पद मूला।।
English explanation
Heads that do not bow at the feet of Hari and the guru are like bitter gourds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those |
| सिर | सिर | heads |
| कटु | कड़वी | bitter |
| तुंबरि | तुम्बी | gourd |
| समतूला | के समान | equal to |
| जे | जो | which |
| न | नहीं | not |
| नमत | झुकते | bow |
| हरि | भगवान हरि | Lord Hari |
| गुर | गुरु | the guru |
| पद | चरणों | feet |
| मूला | के पास | at the base of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 126
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 126, 126
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।