बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तदपि असंका कीन्हिहु सोई। कहत सुनत सब कर हित होई।।
मूल पाठ
तदपि असंका कीन्हिहु सोई। कहत सुनत सब कर हित होई।।
जिन्ह हरि कथा सुनी नहिं काना। श्रवन रंध्र अहिभवन समाना।।
स्रोत अभिलेख 1.113 · पुस्तक पृ. 126, 126
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर भी तुमने इसीलिये वही (पुरानी) शङ्का की है कि इस प्रसङ्गके कहने-सुननेसे सबका कल्याण होगा। जिन्होंने अपने कानोंसे भगवान्की कथा नहीं सुनी, उनके कानोंके छिद्र साँपके बिलके समान हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 126 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तदपि असंका कीन्हिहु सोई। कहत सुनत सब कर हित होई।।
English explanation
AI draft translation: Even so, you raised that very doubt; speaking and hearing about it will benefit everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | even so |
| असंका | शंका | doubt |
| कीन्हिहु | आपने की | you raised |
| सोई | वही | that very one |
| कहत | कहने से | by telling |
| सुनत | सुनने से | by hearing |
| सब | सबका | everyone |
| कर | का | of |
| हित | कल्याण | benefit |
| होई | होगा | will result |
2 जिन्ह हरि कथा सुनी नहिं काना। श्रवन रंध्र अहिभवन समाना।।
English explanation
The earholes of those who have not heard Hari’s story are like snake holes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन्होंने | those who |
| हरि | भगवान हरि की | of Lord Hari |
| कथा | कथा | story |
| सुनी | सुनी | heard |
| नहिं | नहीं | not |
| काना | कानों से | with their ears |
| श्रवन | कानों के | of the ears |
| रंध्र | छिद्र | openings |
| अहिभवन | साँपों के बिल | snake holes |
| समाना | के समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 126
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 126, 126
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।