बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिन्ह हरिभगति हृदयँ नहिं आनी। जीवत सव समान तेइ प्रानी।।
मूल पाठ
जिन्ह हरिभगति हृदयँ नहिं आनी। जीवत सव समान तेइ प्रानी।।
जो नहिं करइ राम गुन गाना। जीह सो दादुर जीह समाना।।
स्रोत अभिलेख 1.113 · पुस्तक पृ. 126, 126
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन्होंने भगवान्की भक्तिको अपने हृदयमें स्थान नहीं दिया, वे प्राणी जीते हुए ही मुर्देके समान हैं। जो जीभ श्रीरामचन्द्रजीके गुणोंका गान नहीं करती, वह मेढककी जीभके समान है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 126 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जिन्ह हरिभगति हृदयँ नहिं आनी। जीवत सव समान तेइ प्रानी।।
English explanation
Those who have not brought devotion to Hari into their hearts are like corpses even while alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन्होंने | those who |
| हरिभगति | हरि की भक्ति | devotion to Hari |
| हृदयँ | हृदय में | into the heart |
| नहिं | नहीं | not |
| आनी | लाई या बसाई | brought or established |
| जीवत | जीवित होते हुए | while alive |
| सव | शव | corpse |
| समान | के समान | like |
| तेइ | वे ही | those very |
| प्रानी | प्राणी | beings |
2 जो नहिं करइ राम गुन गाना। जीह सो दादुर जीह समाना।।
English explanation
A tongue that does not sing Rama’s virtues is like a frog’s tongue.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | which |
| नहिं | नहीं | not |
| करइ | करती है | does |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| गुन | गुणों का | virtues |
| गाना | गान | singing |
| जीह | जीभ | tongue |
| सो | वह | that |
| दादुर | मेंढक की | a frog’s |
| जीह | जीभ | tongue |
| समाना | के समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 126
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 126, 126
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।