बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती। सुनि हरिचरित न जो हरषाती।।
मूल पाठ
कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती। सुनि हरिचरित न जो हरषाती।।
गिरिजा सुनहु राम कै लीला। सुर हित दनुज बिमोहनसीला।।
स्रोत अभिलेख 1.113 · पुस्तक पृ. 126, 126
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह हृदय वज्रके समान कड़ा और निष्ठुर है, जो भगवान्के चरित्र सुनकर हॢषत नहीं होता। हे पार्वती! श्रीरामचन्द्रजीकी लीला सुनो, यह देवताओंका कल्याण करनेवाली और दैत्योंको विशेषरूपसे मोहित करनेवाली है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 126 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती। सुनि हरिचरित न जो हरषाती।।
English explanation
The heart that does not rejoice on hearing Hari’s deeds is hard as a thunderbolt and unfeeling.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुलिस | वज्र जैसा | as a thunderbolt |
| कठोर | कठोर | hard |
| निठुर | निष्ठुर | unfeeling |
| सोइ | वही | that very |
| छाती | छाती अर्थात हृदय | breast, meaning heart |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| हरिचरित | हरि के चरित | Hari’s deeds |
| न | नहीं | not |
| जो | जो | which |
| हरषाती | आनंदित होती | rejoices |
2 गिरिजा सुनहु राम कै लीला। सुर हित दनुज बिमोहनसीला।।
English explanation
O Girija, listen to Rama’s divine play, which benefits the gods and bewilders the demons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरिजा | हे पार्वती, पर्वत की पुत्री | O Parvati, daughter of the mountain |
| सुनहु | सुनो | listen |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कै | की | of |
| लीला | लीला | divine play |
| सुर | देवताओं के | the gods’ |
| हित | हित करने वाली | benefiting |
| दनुज | दानवों को | demons |
| बिमोहनसीला | मोह में डालने के स्वभाव वाली | having the power to bewilder |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 126
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 126, 126
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