बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने। नहिं सारद पहिं जाहिं बखाने।।
मूल पाठ
दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने। नहिं सारद पहिं जाहिं बखाने।।
राज समाजु एक रथ साजा। दूसर तेज पुंज अति भ्राजा।।
स्रोत अभिलेख 1.301 · पुस्तक पृ. 284, 285
भावार्थ
मूल पाठ के बाददोनों सुन्दर रथ वे राजा दशरथके पास ले आये, जिनकी सुन्दरताका वर्णन सरस्वतीसे भी नहीं हो सकता। एक रथपर राजसी सामान सजाया गया। और दूसरा जो तेजका पुंज और अत्यन्त ही शोभायमान था,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 284 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने। नहिं सारद पहिं जाहिं बखाने।।
English explanation
The two beautiful chariots were brought before the king; even Saraswati cannot adequately describe them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दोउ | दोनों | both |
| रथ | रथ | chariots |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| भूप | राजा | the king |
| पहिं | के पास | before |
| आने | लाए | brought |
| नहिं | नहीं | not |
| सारद | वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech |
| पहिं | से भी | even by |
| जाहिं | हो सकते | can be |
| बखाने | वर्णित | described |
2 राज समाजु एक रथ साजा। दूसर तेज पुंज अति भ्राजा।।
English explanation
One chariot was furnished with royal equipment; the other shone magnificently as a mass of radiance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राज | राजसी | royal |
| समाजु | साज-सामान | equipment and furnishings |
| एक | एक | one |
| रथ | रथ | chariot |
| साजा | सजाया गया | was furnished |
| दूसर | दूसरा | the other |
| तेज | तेज का | of radiance |
| पुंज | पुंज | mass |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| भ्राजा | शोभित हुआ | shone splendidly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.301
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 284
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 284, 285
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।