बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गावहिं गीत मनोहर नाना। अति आनंदु न जाइ बखाना।।
मूल पाठ
गावहिं गीत मनोहर नाना। अति आनंदु न जाइ बखाना।।
तब सुमंत्र दुइ स्पंदन साजी। जोते रबि हय निंदक बाजी।।
स्रोत अभिलेख 1.301 · पुस्तक पृ. 284, 285
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर नाना प्रकारके मनोहर गीत गा रही हैं। उनके अत्यन्त आनन्दका बखान नहीं हो सकता। तब सुमन्त्रजीने दो रथ सजाकर उनमें सूर्यके घोड़ोंको भी मात करनेवाले घोड़े जोते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 284 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गावहिं गीत मनोहर नाना। अति आनंदु न जाइ बखाना।।
English explanation
They sing many delightful songs; the immense joy cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गावहिं | गाती हैं | sing |
| गीत | गीत | songs |
| मनोहर | मनोहर | delightful |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| अति | अत्यधिक | immense |
| आनंदु | आनंद | joy |
| न | नहीं | not |
| जाइ | हो सकता | can be |
| बखाना | वर्णित | described |
2 तब सुमंत्र दुइ स्पंदन साजी। जोते रबि हय निंदक बाजी।।
English explanation
Then Sumantra prepared two chariots and harnessed horses that outshone even the sun’s horses; the chariot sense of ‘स्पंदन’ is inferred from context.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| सुमंत्र | दशरथ के मंत्री सुमंत्र | Sumantra, Dasharatha’s minister |
| दुइ | दो | two |
| स्पंदन | रथ | chariots |
| साजी | सजाकर | having prepared |
| जोते | जोते | harnessed |
| रबि | सूर्य के | of the sun |
| हय | घोड़ों को | the horses |
| निंदक | मात देने वाले | surpassing |
| बाजी | घोड़े | horses |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.301
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 284
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 284, 285
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।