बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
महा भीर भूपति के द्वारें। रज होइ जाइ पषान पबारें।।
मूल पाठ
महा भीर भूपति के द्वारें। रज होइ जाइ पषान पबारें।।
चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नारीं। लिंएँ आरती मंगल थारी।।
स्रोत अभिलेख 1.301 · पुस्तक पृ. 284, 285
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा दशरथके दरवाजेपर इतनी भारी भीड़ हो रही है कि वहाँ पत्थर फेंका जाय तो वह भी पिसकर धूल हो जाय। अटारियोंपर चढ़ी स्त्रियाँ मङ्गल-थालोंमें आरती लिये देख रही हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 284 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 महा भीर भूपति के द्वारें। रज होइ जाइ पषान पबारें।।
English explanation
A great crowd gathers at the king’s gate; under its trampling, even stones turn to dust—the final word’s reading is somewhat uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महा | बहुत बड़ी | very great |
| भीर | भीड़ | crowd |
| भूपति | राजा | the king |
| के | के | of |
| द्वारें | द्वार पर | at the gate |
| रज | धूल | dust |
| होइ | हो | become |
| जाइ | जाते हैं | come to be |
| पषान | पत्थर | stones |
| पबारें | रौंदे जाने से | through being trampled |
2 चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नारीं। लिंएँ आरती मंगल थारी।।
English explanation
Women climb onto the terraces and watch, holding auspicious trays for the lamp-waving ceremony.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चढ़ी | चढ़कर | having climbed |
| अटारिन्ह | अटारियों पर | onto the terraces |
| देखहिं | देखती हैं | watch |
| नारीं | स्त्रियाँ | women |
| लिंएँ | लिए हुए | holding |
| आरती | आरती की | for the lamp-waving ceremony |
| मंगल | मंगलमय | auspicious |
| थारी | थालियाँ | trays |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.301
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 284
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 284, 285
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।