बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं।।
मूल पाठ
देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं।।
मुदित देवगन रामहि देखी। नृपसमाज दुहुँ हरषु बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 1.317 · पुस्तक पृ. 297, 298
भावार्थ
मूल पाठ के बादसभी देवता देवराज इन्द्रसे ईष्र्या कर रहे हैं [और कह रहे हैं] कि आज इन्द्रके समान भाग्यवान् दूसरा कोई नहीं है। श्रीरामचन्द्रजीको देखकर देवगण प्रसन्न हैं और दोनों राजाओंके समाजमें विशेष हर्ष छा रहा है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 298 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं।।
English explanation
All the gods envy Indra’s good fortune: today no one is his equal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | देवता | gods |
| सकल | सभी | all |
| सुरपतिहि | देवराज इंद्र के सौभाग्य की | Indra’s good fortune |
| सिहाहीं | स्पृहा करते हैं | admire enviously |
| आजु | आज | today |
| पुरंदर | इंद्र | Indra |
| सम | के समान | equal to |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहीं | नहीं है | there is not |
2 मुदित देवगन रामहि देखी। नृपसमाज दुहुँ हरषु बिसेषी।।
English explanation
The gods rejoiced on seeing Rama; both royal assemblies were especially joyful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| देवगन | देवताओं का समूह | the host of gods |
| रामहि | राम को | Rama |
| देखी | देखकर | on seeing |
| नृपसमाज | राजाओं के समाजों में | in the royal assemblies |
| दुहुँ | दोनों | both |
| हरषु | हर्ष | joy |
| बिसेषी | विशेष था | was especially great |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.317
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 298
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 297, 298
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।