बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुर सेनप उर बहुत उछाहू। बिधि ते डेवढ़ लोचन लाहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेवताओंके सेनापति स्वामिकाॢतकके हृदयमें बड़ा उत्साह है, क्योंकि वे ब्रह्माजीसे ड्योढ़े अर्थात् बारह नेत्रोंसे रामदर्शनका सुन्दर लाभ उठा रहे हैं। सुजान इन्द्र [अपने हजार नेत्रोंसे] श्रीरामचन्द्रजीको देख रहे हैं और गौतमजीके शापको अपने लिये परम हितकर मान रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 298 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुर सेनप उर बहुत उछाहू। बिधि ते डेवढ़ लोचन लाहू।।
रामहि चितव सुरेस सुजाना। गौतम श्रापु परम हित माना।।
स्रोत अभिलेख 1.317 · पुस्तक पृ. 297, 298
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुर सेनप उर बहुत उछाहू। बिधि ते डेवढ़ लोचन लाहू।।
English explanation
Kartikeya, commander of the gods, felt great delight: he had the advantage of one and a half times as many eyes as Brahma.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| सेनप | सेनापति, कार्तिकेय | commander, Kartikeya |
| उर | हृदय में | in his heart |
| बहुत | बहुत | great |
| उछाहू | उत्साह | delight |
| बिधि | ब्रह्मा | Brahma |
| ते | की अपेक्षा | compared with |
| डेवढ़ | डेढ़ गुने | one and a half times as many |
| लोचन | नेत्रों का | eyes |
| लाहू | लाभ | advantage |
2 रामहि चितव सुरेस सुजाना। गौतम श्रापु परम हित माना।।
English explanation
Wise Indra, king of the gods, gazes at Rama and regards Gautama’s curse as a supreme benefit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | at Rama |
| चितव | निहारते हैं | gazes |
| सुरेस | देवराज इंद्र | Indra, king of the gods |
| सुजाना | बुद्धिमान | wise |
| गौतम | ऋषि गौतम का | sage Gautama’s |
| श्रापु | शाप | curse |
| परम | अत्यंत | supremely |
| हित | हितकारी | beneficial |
| माना | माना | regarded as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.317
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 298
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 297, 298
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।