बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे देव! आपके दोनों बालकोंको देखनेके बाद अब आँखोंके नीचे कोई आता ही नहीं (हमारी दृष्टिपर कोई चढ़ता ही नहीं)। प्रेम, प्रताप और वीर-रसमें पगी हुई दूतोंकी वचनरचना सबको बहुत प्रिय लगी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 278 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।।
दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी।।
स्रोत अभिलेख 1.293 · पुस्तक पृ. 278, 278
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।।
English explanation
My lord, having seen your two sons, no one else now measures up in our eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | हे महाराज | my lord |
| देखि | देखकर | having seen |
| तव | आपके | your |
| बालक | बालक; पुत्र | sons |
| दोऊ | दोनों | both |
| अब | अब | now |
| न | नहीं | not |
| आँखि | आँखों के | eyes |
| तर | नीचे; दृष्टि में | under; within sight |
| आवत | आता; जँचता | comes; measures up |
| कोऊ | कोई अन्य | anyone else |
2 दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी।।
English explanation
The messengers’ phrasing was pleasing, steeped in love, the princes’ prowess, and heroic sentiment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दूत | दूतों के | the messengers’ |
| बचन | वचनों की | words |
| रचना | रचना; कहने की शैली | composition; phrasing |
| प्रिय | प्रिय; मनभावन | pleasing |
| लागी | लगी | seemed |
| प्रेम | प्रेम | love |
| प्रताप | प्रताप; पराक्रम की महिमा | glory of prowess |
| बीर | वीरता का | heroic |
| रस | रस; भावात्मक आस्वाद | sentiment; aesthetic flavor |
| पागी | पगी हुई; सराबोर | steeped; suffused |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.293
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 278
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 278, 278
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।