बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे देव! हमारे तो एक ही गुण धनुष है और आपके परम पवित्र [शम, दम, तप, शौच, क्षमा, सरलता, ज्ञान, विज्ञान और आस्तिकता—ये] नौ गुण हैं। हम तो सब प्रकारसे आपसे हारे हैं। हे विप्र! हमारे अपराधोंको क्षमा कीजिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 269 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।।
सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारे।।
स्रोत अभिलेख 1.282 · पुस्तक पृ. 269, 270
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।।
English explanation
Revered sir, our bow has one string—a ‘guna’; you possess nine supremely pure virtues—‘gunas’.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | हे आदरणीय | revered sir |
| एकु | एक | one |
| गुनु | डोरी; गुण | bowstring; quality |
| धनुष | धनुष में | in the bow |
| हमारें | हमारे | our |
| नव | नौ | nine |
| गुन | गुण; ब्राह्मणोचित सद्गुण | virtues appropriate to a Brahmin |
| परम | अत्यंत | supremely |
| पुनीत | पवित्र | pure |
| तुम्हारें | आपमें; आपके | in you; yours |
2 सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारे।।
English explanation
We are bested by you in every way; O Brahmin, forgive our offenses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | every |
| प्रकार | प्रकार से | in ways; in respects |
| हम | हम | we |
| तुम्ह | आप | you |
| सन | से | by; in comparison with |
| हारे | हारे हैं | are bested |
| छमहु | क्षमा कीजिए | please forgive |
| बिप्र | हे ब्राह्मण | O Brahmin |
| अपराध | अपराध | offenses |
| हमारे | हमारे | our |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.282
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 269
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 269, 270
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।