बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआमके वृक्षकी एक सुन्दर डाली देखकर मनमें क्रोधसे भरा हुआ कामदेव उसपर चढ़ गया। उसने पुष्प-धनुषपर अपने [पाँचों] बाण चढ़ाये और अत्यन्त क्रोधसे [लक्ष्यकी ओर] ताककर उन्हें कानतक तान लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 101 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा।।
सुमन चाप निज सर संधाने। अति रिस ताकि श्रवन लगि ताने।।
स्रोत अभिलेख 1.87 · पुस्तक पृ. 101, 102
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा।।
English explanation
Seeing a fine branch of a mango tree, Kama climbed onto it, angry at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| रसाल | आम का | mango |
| बिटप | वृक्ष | tree |
| बर | सुंदर, उत्तम | fine, excellent |
| साखा | शाखा | branch |
| तेहि | उस शाखा | that branch |
| पर | पर | on |
| चढ़ेउ | चढ़ गए | climbed |
| मदनु | कामदेव | Kama, the god of desire |
| मन | मन में | at heart |
| माखा | क्रोधित हुए | angered |
2 सुमन चाप निज सर संधाने। अति रिस ताकि श्रवन लगि ताने।।
English explanation
He fitted his arrows to his flower-bow and, aiming in great anger, drew them back to his ear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमन | पुष्पों का | made of flowers |
| चाप | धनुष | bow |
| निज | अपने | his own |
| सर | बाण | arrows |
| संधाने | धनुष पर चढ़ाए | fitted to the bow |
| अति | अत्यंत | extreme |
| रिस | क्रोध से | in anger |
| ताकि | निशाना साधकर | having taken aim |
| श्रवन | कान | ear |
| लगि | तक | as far as |
| ताने | खींचे | drew back |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.87
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 101
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना · रतिको वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 101, 102
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।