बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता। किमि कहि जात मोदु मन जेता।।
मूल पाठ
देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता। किमि कहि जात मोदु मन जेता।।
प्रातक्रिया करि गे गुरु पाहीं। महाप्रमोदु प्रेमु मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.33 · पुस्तक पृ. 315, 316
भावार्थ
मूल पाठ के बादचारों कुमारोंको सुन्दर वधुओंसहित देखकर उनके मनमें जितना आनन्द है, वह किस प्रकार कहा जा सकता है? वे प्रात:क्रिया करके गुरु वसिष्ठजीके पास गये। उनके मनमें महान् आनन्द और प्रेम भरा है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 315 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता। किमि कहि जात मोदु मन जेता।।
English explanation
Seeing the noble princes together with their brides, how could the extent of Dasharatha’s joy be expressed?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| कुअँर | राजकुमारों को | the princes |
| बर | श्रेष्ठ | noble |
| बधुन्ह | वधुओं के | their brides |
| समेता | सहित | together with |
| किमि | कैसे | how |
| कहि | कहा | expressed |
| जात | जा सकता है | could be |
| मोदु | आनंद | joy |
| मन | मन में | in the heart |
| जेता | जितना | as much as |
2 प्रातक्रिया करि गे गुरु पाहीं। महाप्रमोदु प्रेमु मन माहीं।।
English explanation
After performing his morning duties, Dasharatha went to his preceptor, with great joy and love in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रातक्रिया | प्रातःकाल के नित्यकर्म | morning observances |
| करि | करके | having performed |
| गे | गए | went |
| गुरु | गुरु वसिष्ठ के | his preceptor Vasishtha |
| पाहीं | पास | to the presence of |
| महाप्रमोदु | अत्यंत आनंद | great joy |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| मन | मन | the heart |
| माहीं | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 315
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 315, 316
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।