बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करि प्रनाम पूजा कर जोरी। बोले गिरा अमिअँ जनु बोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजा प्रणाम और पूजन करके, फिर हाथ जोड़कर मानो अमृतमें डुबोयी हुई वाणी बोले— हे मुनिराज! सुनिये, आपकी कृपासे आज मैं पूर्णकाम हो गया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 315 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
करि प्रनाम पूजा कर जोरी। बोले गिरा अमिअँ जनु बोरी।।
तुम्हरी कृपाँ सुनहु मुनिराजा। भयउँ आजु मैं पूरनकाजा।।
स्रोत अभिलेख 1.33 · पुस्तक पृ. 315, 316
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 करि प्रनाम पूजा कर जोरी। बोले गिरा अमिअँ जनु बोरी।।
English explanation
After bowing and offering worship, Dasharatha joined his hands and spoke words as though steeped in nectar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| प्रनाम | प्रणाम | a reverential bow |
| पूजा | पूजा | worship |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| बोले | बोले | spoke |
| गिरा | वाणी | words |
| अमिअँ | अमृत में | in nectar |
| जनु | मानो | as though |
| बोरी | डुबोई हुई | steeped |
2 तुम्हरी कृपाँ सुनहु मुनिराजा। भयउँ आजु मैं पूरनकाजा।।
English explanation
Listen, O great sage! By your grace, today I have become one whose purposes are fulfilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हरी | आपकी | your |
| कृपाँ | कृपा से | by grace |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| मुनिराजा | हे मुनियों के राजा | O foremost sage |
| भयउँ | हो गया हूँ | have become |
| आजु | आज | today |
| मैं | मैं | I |
| पूरनकाजा | जिसके कार्य पूर्ण हो गए हों | one whose purposes are fulfilled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 315
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 315, 316
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।