बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब सब बिप्र बोलाइ गोसाईं। देहु धेनु सब भाँति बनाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे स्वामिन्! अब सब ब्राह्मणोंको बुलाकर उनको सब तरह [गहनों-कपड़ों] से सजी हुई गायें दीजिये। यह सुनकर गुरुजीने राजाकी बड़ाई करके फिर मुनिगणोंको बुलवा भेजा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 316 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अब सब बिप्र बोलाइ गोसाईं। देहु धेनु सब भाँति बनाई।।
सुनि गुर करि महिपाल बड़ाई। पुनि पठए मुनि बृंद बोलाई।।
स्रोत अभिलेख 1.33 · पुस्तक पृ. 315, 316
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब सब बिप्र बोलाइ गोसाईं। देहु धेनु सब भाँति बनाई।।
English explanation
O master, now summon all the Brahmins and give them cows, making all the proper arrangements.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सब | सभी | all |
| बिप्र | ब्राह्मणों को | the Brahmins |
| बोलाइ | बुलाकर | having summoned |
| गोसाईं | हे स्वामी | O master |
| देहु | दीजिए | give |
| धेनु | गायें | cows |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | in respect |
| बनाई | उचित व्यवस्था करके | having made proper arrangements |
2 सुनि गुर करि महिपाल बड़ाई। पुनि पठए मुनि बृंद बोलाई।।
English explanation
Hearing this, the preceptor praised the king, then sent word to summon the assembly of sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| गुर | गुरु ने | the preceptor |
| करि | की | offered |
| महिपाल | राजा की | of the king |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| पुनि | फिर | then |
| पठए | संदेश भेजे | sent word |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| बृंद | समूह को | the assembly |
| बोलाई | बुलाने के लिए | to summon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 316
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 315, 316
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।