बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नित नूतन मंगल पुर माहीं। निमिष सरिस दिन जामिनि जाहीं।।
मूल पाठ
नित नूतन मंगल पुर माहीं। निमिष सरिस दिन जामिनि जाहीं।।
बड़े भोर भूपतिमनि जागे। जाचक गुन गन गावन लागे।।
स्रोत अभिलेख 1.33 · पुस्तक पृ. 315, 316
भावार्थ
मूल पाठ के बादजनकपुरमें नित्य नये मङ्गल हो रहे हैं। दिन और रात पलके समान बीत जाते हैं। बड़े सबेरे राजाओंके मुकुटमणि दशरथजी जागे। याचक उनके गुणसमूहका गान करने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 315 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नित नूतन मंगल पुर माहीं। निमिष सरिस दिन जामिनि जाहीं।।
English explanation
AI draft: New auspicious celebrations take place in the city every day; days and nights pass like the blink of an eye.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | प्रतिदिन | every day |
| नूतन | नए | new |
| मंगल | मंगलोत्सव | auspicious celebrations |
| पुर | नगर | the city |
| माहीं | में | in |
| निमिष | पलक झपकने का समय | a blink of an eye |
| सरिस | के समान | like |
| दिन | दिन | days |
| जामिनि | रातें | nights |
| जाहीं | बीत जाते हैं | pass by |
2 बड़े भोर भूपतिमनि जागे। जाचक गुन गन गावन लागे।।
English explanation
Very early at dawn, Dasharatha, the jewel among kings, awoke; those seeking gifts began singing his many virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बड़े | बहुत जल्दी | very early |
| भोर | भोर में | at dawn |
| भूपतिमनि | राजाओं के रत्न दशरथ | Dasharatha, the jewel among kings |
| जागे | जागे | awoke |
| जाचक | दान माँगने वाले | those seeking gifts |
| गुन | गुणों का | of virtues |
| गन | समूह | the multitude |
| गावन | गाने | to sing |
| लागे | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 315
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 315, 316
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।