बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दूलहु रामु रूप गुन सागर। सो बितानु तिहुँ लोक उजागर।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिस मण्डपमें रूप और गुणोंके समुद्र श्रीरामचन्द्रजी दूल्हे होंगे, वह मण्डप तीनों लोकोंमें प्रसिद्ध होना ही चाहिये। जनकजीके महलकी जैसी शोभा है, वैसी ही शोभा नगरके प्रत्येक घरकी दिखायी देती है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 275 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दूलहु रामु रूप गुन सागर। सो बितानु तिहुँ लोक उजागर।।
जनक भवन कै सौभा जैसी। गृह गृह प्रति पुर देखिअ तैसी।।
स्रोत अभिलेख 1.289 · पुस्तक पृ. 274, 275
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दूलहु रामु रूप गुन सागर। सो बितानु तिहुँ लोक उजागर।।
English explanation
The bridegroom Rama is an ocean of beauty and virtues; that wedding canopy is renowned throughout the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दूलहु | दूल्हा | the bridegroom |
| रामु | श्रीराम | Rama, Sita’s bridegroom |
| रूप | सौंदर्य | beauty |
| गुन | सद्गुण | virtues |
| सागर | सागर; अपार भंडार | ocean; boundless store |
| सो | वह | that |
| बितानु | विवाह का चँदोवा या मंडप | wedding canopy or pavilion |
| तिहुँ | तीनों | all three |
| लोक | लोकों में | worlds |
| उजागर | प्रसिद्ध | renowned |
2 जनक भवन कै सौभा जैसी। गृह गृह प्रति पुर देखिअ तैसी।।
English explanation
The splendor seen in Janaka’s palace was likewise visible in every house in the city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | सीता के पिता राजा जनक | King Janaka, Sita’s father |
| भवन | महल | palace |
| कै | की | of |
| सौभा | शोभा; सुंदर सजावट | splendor; beautiful decoration |
| जैसी | जिस प्रकार की | of the kind that |
| गृह | घर | house |
| गृह | घर | house |
| प्रति | प्रत्येक में | in each |
| पुर | नगर में | in the city |
| देखिअ | दिखाई देती थी | was to be seen |
| तैसी | वैसी ही | just such |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.289
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 275
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 274, 275
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।