बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा। उबरा सो जनवासेहिं आवा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउन्होंने वह दहेजका सामान याचकोंको, जो जिसे अच्छा लगा, दे दिया। जो बच रहा, वह जनवासेमें चला आया। तब जनकजी हाथ जोड़कर सारी बारातका सम्मान करते हुए कोमल वाणीसे बोले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 310 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा। उबरा सो जनवासेहिं आवा।।
तब कर जोरि जनकु मृदु बानी। बोले सब बरात सनमानी।।
स्रोत अभिलेख 1.326 · पुस्तक पृ. 309, 310
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा। उबरा सो जनवासेहिं आवा।।
English explanation
AI-draft meaning: Each supplicant was given whatever pleased them; what remained came to the wedding party’s lodging.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन्ह | दिया | gave |
| जाचकन्हि | याचकों को | to the supplicants |
| जो | जो वस्तु | whatever |
| जेहि | जिसे | to whom |
| भावा | पसंद आई | was pleasing |
| उबरा | बचा | remained |
| सो | वह | that |
| जनवासेहिं | बारात के ठहरने के स्थान पर | to the wedding party’s lodging |
| आवा | आया | came |
2 तब कर जोरि जनकु मृदु बानी। बोले सब बरात सनमानी।।
English explanation
AI-draft meaning: Then King Janaka joined his hands and spoke gently, honoring the entire wedding party.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | joining |
| जनकु | राजा जनक | King Janaka, Sita’s father |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
| बोले | बोले | spoke |
| सब | पूरी | the entire |
| बरात | बारात का | wedding party |
| सनमानी | सम्मान करके | having honored |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.326
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 310
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 309, 310
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।