बालकाण्ड · छंद · छंद
सनमानि सकल बरात आदर दान बिनय बड़ाइ कै।
मूल पाठ
सनमानि सकल बरात आदर दान बिनय बड़ाइ कै।
प्रमुदित महा मुनि बृंद बंदे पूजि प्रेम लड़ाइ कै॥
सिरु नाइ देव मनाइ सब सन कहत कर संपुट किएँ।
सुर साधु चाहत भाउ सिंधु कि तोष जल अंजलि दिएँ॥
स्रोत अभिलेख 1.326 · पुस्तक पृ. 309, 310
भावार्थ
मूल पाठ के बादआदर, दान, विनय और बड़ाईके द्वारा सारी बारातका सम्मान कर राजा जनकने महान् आनन्दके साथ प्रेमपूर्वक लड़ाकर (लाड़ करके) मुनियोंके समूहकी पूजा एवं वन्दना की। सिर नवाकर, देवताओंको मनाकर, राजा हाथ जोड़कर सबसे कहने लगे कि देवता और साधु तो भाव ही चाहते हैं (वे प्रेमसे ही प्रसन्न हो जाते हैं, उन पूर्णकाम महानुभावोंको कोई कुछ देकर कैसे सन्तुष्ट कर सकता है); क्या एक अञ्जलि जल देनेसे कहीं समुद्र सन्तुष्ट हो सकता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 310 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1सनमानि सकल बरात आदर दान बिनय बड़ाइ कै।
English explanation
AI-draft meaning: The entire wedding party was honored with hospitality, gifts, humility, and praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सनमानि | सम्मान करके | having honored |
| सकल | समस्त | entire |
| बरात | विवाह की बरात | wedding party |
| आदर | आदर-सत्कार | hospitality and respect |
| दान | उपहार देना | giving gifts |
| बिनय | विनम्रता | humility |
| बड़ाइ | प्रशंसा | praise |
| कै | करके | having done |
2प्रमुदित महा मुनि बृंद बंदे पूजि प्रेम लड़ाइ कै॥
English explanation
With great joy, he worshiped the assembled sages, treated them affectionately, and bowed to them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रमुदित | प्रसन्न होकर | being delighted |
| महा | अत्यंत | greatly |
| मुनि | ऋषि-मुनि | sages |
| बृंद | समूह | assembly |
| बंदे | वंदना की | bowed to |
| पूजि | पूजा करके | having worshiped |
| प्रेम | स्नेह | affection |
| लड़ाइ | दुलार करके | showing loving regard |
| कै | करके | having done |
3सिरु नाइ देव मनाइ सब सन कहत कर संपुट किएँ।
English explanation
Bowing his head and propitiating the gods, he addresses everyone with joined hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिरु | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| देव | देवताओं को | the gods |
| मनाइ | प्रसन्न करके | having propitiated |
| सब | सभी | everyone |
| सन | से | to |
| कहत | कहते हैं | says |
| कर | हाथ | hands |
| संपुट | अंजलि के रूप में जुड़े | joined in supplication |
| किएँ | किए हुए | having made |
4सुर साधु चाहत भाउ सिंधु कि तोष जल अंजलि दिएँ॥
English explanation
Gods and holy people desire loving sincerity; can the ocean be satisfied by an offering of a handful of water?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | gods |
| साधु | संत-सज्जन | holy people |
| चाहत | चाहते हैं | desire |
| भाउ | प्रेमपूर्ण भाव | loving sincerity |
| सिंधु | समुद्र | ocean |
| कि | क्या | can; whether |
| तोष | संतोष | satisfaction |
| जल | पानी | water |
| अंजलि | जुड़ी हथेलियों भर | a cupped handful |
| दिएँ | देने से | by giving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 1.326
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 310
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 309, 310
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।