बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना। मानहुँ ब्रह्मानंद समाना।।
मूल पाठ
दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना। मानहुँ ब्रह्मानंद समाना।।
परम प्रेम मन पुलक सरीरा। चाहत उठत करत मति धीरा।।
स्रोत अभिलेख 1.193 · पुस्तक पृ. 193, 194
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा दशरथजी पुत्रका जन्म कानोंसे सुनकर मानो ब्रह्मानन्दमें समा गये। मनमें अतिशय प्रेम है, शरीर पुलकित हो गया। [आनन्दमें अधीर हुई] बुद्धिको धीरज देकर [और प्रेममें शिथिल हुए शरीरको सँभालकर] वे उठना चाहते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 193 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना। मानहुँ ब्रह्मानंद समाना।।
English explanation
When Dasharatha heard the news of his son's birth, it was as though he became immersed in the bliss of Brahman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दसरथ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| पुत्रजन्म | पुत्र के जन्म का समाचार | news of his son's birth |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| काना | कानों से | with his ears |
| मानहुँ | मानो | as though |
| ब्रह्मानंद | ब्रह्म का परम आनंद | the supreme bliss of Brahman |
| समाना | समाहित हो गए | became immersed |
2 परम प्रेम मन पुलक सरीरा। चाहत उठत करत मति धीरा।।
English explanation
His heart was filled with intense love, and his body thrilled with goosebumps. He wished to rise, while steadying his mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत | intense |
| प्रेम | प्रेम | love |
| मन | मन में | in his heart |
| पुलक | रोमांच | goosebumps of joy |
| सरीरा | शरीर में | on his body |
| चाहत | चाहते थे | wished |
| उठत | उठना | to rise |
| करत | करते थे | made |
| मति | बुद्धि को | his mind |
| धीरा | धैर्यवान और स्थिर | composed and steady |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.193
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 193
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 193, 194
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।