बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दच्छसुतन्ह उपदेसेन्हि जाई। तिन्ह फिरि भवनु न देखा आई।।
मूल पाठ
दच्छसुतन्ह उपदेसेन्हि जाई। तिन्ह फिरि भवनु न देखा आई।।
चित्रकेतु कर घरु उन घाला। कनककसिपु कर पुनि अस हाला।।
स्रोत अभिलेख 1.79 · पुस्तक पृ. 94, 95
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने जाकर दक्षके पुत्रोंको उपदेश दिया था, जिससे उन्होंने फिर लौटकर घरका मुँह भी नहीं देखा। चित्रकेतुके घरको नारदने ही चौपट किया। फिर यही हाल हिरण्यकशिपुका हुआ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 94 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दच्छसुतन्ह उपदेसेन्हि जाई। तिन्ह फिरि भवनु न देखा आई।।
English explanation
He went and instructed Daksha’s sons; those sons never returned to see their home again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दच्छसुतन्ह | दक्ष के पुत्रों को | to Daksha’s sons |
| उपदेसेन्हि | उन्होंने उपदेश दिया | he instructed them |
| जाई | जाकर | having gone |
| तिन्ह | उन पुत्रों ने | those sons |
| फिरि | फिर लौटकर | returning again |
| भवनु | घर | home |
| न | नहीं | not |
| देखा | देखा | saw |
| आई | आकर | having come back |
2 चित्रकेतु कर घरु उन घाला। कनककसिपु कर पुनि अस हाला।।
English explanation
He ruined Chitraketu’s household; Hiranyakashipu’s suffered the same fate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चित्रकेतु | राजा चित्रकेतु | King Chitraketu |
| कर | का | of |
| घरु | घर-परिवार | household |
| उन | उन्होंने, नारद ने | he, Narada |
| घाला | उजाड़ दिया | ruined |
| कनककसिपु | हिरण्यकशिपु, प्रह्लाद का पिता | Hiranyakashipu, Prahlada’s father |
| कर | का | of |
| पुनि | फिर भी | in turn, also |
| अस | ऐसा | such |
| हाला | हाल | fate; condition |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 94
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 94, 95
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।