बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। अवसि होहिं तजि भवनु भिखारी।।
मूल पाठ
नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। अवसि होहिं तजि भवनु भिखारी।।
मन कपटी तन सज्जन चीन्हा। आपु सरिस सबही चह कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 1.79 · पुस्तक पृ. 94, 95
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो स्त्री-पुरुष नारदकी सीख सुनते हैं, वे घर-बार छोड़कर अवश्य ही भिखारी हो जाते हैं। उनका मन तो कपटी है, शरीरपर सज्जनोंके चिह्न हैं। वे सभीको अपने समान बनाना चाहते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 94 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। अवसि होहिं तजि भवनु भिखारी।।
English explanation
Men and women who heed Narada’s teaching inevitably abandon their homes and become beggars.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद की | of Narada, the divine sage |
| सिख | सीख | teaching |
| जे | जो | who |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen to; heed |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| अवसि | अवश्य | inevitably |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| भवनु | घर | home |
| भिखारी | भिखारी | beggars |
2 मन कपटी तन सज्जन चीन्हा। आपु सरिस सबही चह कीन्हा।।
English explanation
He is deceitful at heart but outwardly appears virtuous; he wants to make everyone like himself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन से | at heart |
| कपटी | कपट करने वाले | deceitful |
| तन | बाहरी रूप से | in outward appearance |
| सज्जन | भले व्यक्ति | a virtuous person |
| चीन्हा | दिखाई देते हैं; समझे जाते हैं | appears; is regarded as |
| आपु | अपने | himself |
| सरिस | समान | like |
| सबही | सबको ही | everyone |
| चह | चाहते हैं | wants |
| कीन्हा | बनाना | to make |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 94
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 94, 95
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