बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि कें बचन मानि बिस्वासा। तुम्ह चाहहु पति सहज उदासा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनके वचनोंपर विश्वास मानकर तुम ऐसा पति चाहती हो जो स्वभावसे ही उदासीन, गुणहीन, निर्लज्ज, बुरे वेषवाला, नर-कपालोंकी माला पहननेवाला, कुलहीन, बिना घर-बारका, नंगा और शरीरपर साँपोंको लपेटे रखनेवाला है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 94 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तेहि कें बचन मानि बिस्वासा। तुम्ह चाहहु पति सहज उदासा।।
निर्गुन निलज कुबेष कपाली। अकुल अगेह दिगंबर ब्याली।।
स्रोत अभिलेख 1.79 · पुस्तक पृ. 94, 95
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेहि कें बचन मानि बिस्वासा। तुम्ह चाहहु पति सहज उदासा।।
English explanation
Trusting his words, you desire a husband who is detached by nature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उन नारद | that Narada |
| कें | के | of |
| बचन | वचनों पर | words |
| मानि | मानकर | placing; accepting |
| बिस्वासा | विश्वास | trust |
| तुम्ह | तुम, पार्वती | you, Parvati |
| चाहहु | चाहती हो | desire |
| पति | पति | a husband |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| उदासा | विरक्त | detached |
2 निर्गुन निलज कुबेष कपाली। अकुल अगेह दिगंबर ब्याली।।
English explanation
He is without virtues, shameless, ill-clad, skull-bearing, without lineage or home, naked, and adorned with snakes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निर्गुन | गुणहीन | without virtues |
| निलज | निर्लज्ज | shameless |
| कुबेष | बुरे वेश वाले | ill-clad |
| कपाली | कपाल धारण करने वाले | skull-bearing |
| अकुल | कुलहीन | without lineage |
| अगेह | घरहीन | without a home |
| दिगंबर | दिशाओं को वस्त्र मानने वाले; नग्न | clothed in the directions; naked |
| ब्याली | सर्प धारण करने वाले | wearing snakes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 94
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 94, 95
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