बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
थर थर कापहिं पुर नर नारी। छोट कुमार खोट बड़ भारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजनकपुरके स्त्री-पुरुष थर-थर काँप रहे हैं [और मन-ही-मन कह रहे हैं कि] छोटा कुमार बड़ा ही खोटा है। लक्ष्मणजीकी निर्भय वाणी सुन-सुनकर परशुरामजीका शरीर क्रोधसे जला जा रहा है और उनके बलकी हानि हो रही है (उनका बल घट रहा है)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 266 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
थर थर कापहिं पुर नर नारी। छोट कुमार खोट बड़ भारी।।
भृगुपति सुनि सुनि निरभय बानी। रिस तन जरइ होइ बल हानी।।
स्रोत अभिलेख 1.278 · पुस्तक पृ. 266, 266
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 थर थर कापहिं पुर नर नारी। छोट कुमार खोट बड़ भारी।।
English explanation
The city's men and women tremble, saying, “The prince is young, but his misconduct is very grave.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| थर | थरथराहट के साथ | with trembling |
| थर | थरथराहट के साथ | with trembling |
| कापहिं | काँपते हैं | tremble |
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| छोट | छोटा, कम उम्र का | young |
| कुमार | राजकुमार लक्ष्मण | Prince Lakshmana |
| खोट | खोट, उद्दंडता | fault, insolence |
| बड़ | बड़ी | great |
| भारी | बहुत गंभीर | very grave |
2 भृगुपति सुनि सुनि निरभय बानी। रिस तन जरइ होइ बल हानी।।
English explanation
Hearing Lakshmana's fearless words repeatedly, Parashurama's body burns with anger and his strength wanes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भृगुपति | भृगुवंशी परशुराम | Parashurama of Bhrigu's lineage |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सुनि | बार-बार सुनकर | hearing repeatedly |
| निरभय | निर्भय | fearless |
| बानी | वाणी | words |
| रिस | क्रोध से | with anger |
| तन | शरीर | body |
| जरइ | जलता है | burns |
| होइ | होती है | occurs |
| बल | बल की | of strength |
| हानी | हानि | loss |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.278
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 266
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 266, 266
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।