बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौ अति प्रिय तौ करिअ उपाई। जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई।।
मूल पाठ
जौ अति प्रिय तौ करिअ उपाई। जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई।।
बोलत लखनहिं जनकु डेराहीं। मष्ट करहु अनुचित भल नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.278 · पुस्तक पृ. 266, 266
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि धनुष अत्यन्त ही प्रिय हो, तो कोई उपाय किया जाय और किसी बड़े गुणी (कारीगर)को बुलाकर जुड़वा दिया जाय। लक्ष्मणजीके बोलनेसे जनकजी डर जाते हैं और कहते है—बस, चुप रहिये, अनुचित बोलना अच्छा नहीं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 266 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौ अति प्रिय तौ करिअ उपाई। जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई।।
English explanation
If the bow is very dear to you, take some measures: call a highly skilled craftsman and have it mended.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौ | यदि | if |
| अति | बहुत | very |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| तौ | तो | then |
| करिअ | कीजिए | please take |
| उपाई | उपाय | remedial measures |
| जोरिअ | जुड़वा लीजिए | have it mended |
| कोउ | किसी | some |
| बड़ | बड़े | highly |
| गुनी | कुशल कारीगर | skilled craftsman |
| बोलाई | बुलाकर | having called |
2 बोलत लखनहिं जनकु डेराहीं। मष्ट करहु अनुचित भल नाहीं।।
English explanation
As Lakshmana spoke, Janaka grew alarmed and said, “Be quiet; improper speech is not good.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोलत | बोलते हुए | speaking |
| लखनहिं | लक्ष्मण को | Lakshmana |
| जनकु | राजा जनक | King Janaka |
| डेराहीं | घबरा उठे | grew alarmed |
| मष्ट | चुप | quiet |
| करहु | रहो | be |
| अनुचित | अनुचित व्यवहार या वचन | improper conduct or speech |
| भल | अच्छा | good |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.278
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 266
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 266, 266
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।