बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया। परिहरि कोपु करिअ अब दाया।।
मूल पाठ
मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया। परिहरि कोपु करिअ अब दाया।।
टूट चाप नहिं जुरहि रिसाने। बैठिअ होइहिं पाय पिराने।।
स्रोत अभिलेख 1.278 · पुस्तक पृ. 266, 266
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मुनिराज! मैं आपका दास हूँ। अब क्रोध त्यागकर दया कीजिये। टूटा हुआ धनुष क्रोध करनेसे जुड़ नहीं जायगा। खड़े-खड़े पैर दुखने लगे होंगे, बैठ जाइये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 266 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया। परिहरि कोपु करिअ अब दाया।।
English explanation
O revered sage, I am your servant. Give up your anger now and show mercy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| तुम्हार | आपका | your |
| अनुचर | सेवक | servant |
| मुनिराया | हे मुनिराज परशुराम | O revered sage Parashurama |
| परिहरि | छोड़कर | giving up |
| कोपु | क्रोध | anger |
| करिअ | कीजिए | please show |
| अब | अब | now |
| दाया | दया | mercy |
2 टूट चाप नहिं जुरहि रिसाने। बैठिअ होइहिं पाय पिराने।।
English explanation
The broken bow will not be mended by anger. Please sit down; your feet will begin to ache.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| टूट | टूटा हुआ | broken |
| चाप | धनुष | bow |
| नहिं | नहीं | not |
| जुरहि | जुड़ता है | gets mended |
| रिसाने | क्रोध करने से | by becoming angry |
| बैठिअ | बैठ जाइए | please sit down |
| होइहिं | हो जाएँगे | will become |
| पाय | पैर | feet |
| पिराने | दुखते हुए | aching |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.278
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 266
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 266, 266
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।