बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहिं खल पाछिल बयरु सँभरा। तापस नृप मिलि मंत्र बिचारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउस दुष्टने पिछला वैर याद करके तपस्वी राजासे मिलकर सलाह विचारी (षड्यन्त्र किया) और जिस प्रकार शत्रुका नाश हो, वही उपाय रचा। भावीवश राजा (प्रतापभानु) कुछ भी न समझ सका॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 173 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तेहिं खल पाछिल बयरु सँभरा। तापस नृप मिलि मंत्र बिचारा।।
जेहि रिपु छय सोइ रचेन्हि उपाऊ। भावी बस न जान कछु राऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.17 · पुस्तक पृ. 172, 173
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तेहिं खल पाछिल बयरु सँभरा। तापस नृप मिलि मंत्र बिचारा।।
English explanation
The wicked Kalaketu recalled his old enmity and, together with the king posing as an ascetic, deliberated on a secret plan.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उसने; उस कालकेतु ने | he; that Kalaketu |
| खल | दुष्ट | wicked one |
| पाछिल | पुराना | former; old |
| बयरु | वैर | enmity |
| सँभरा | याद किया | recalled |
| तापस | तपस्वी बने | posing as an ascetic |
| नृप | राजा से | with the king |
| मिलि | मिलकर | joining together |
| मंत्र | गुप्त योजना; मंत्रणा | secret plan; counsel |
| बिचारा | विचार किया | deliberated |
2 जेहि रिपु छय सोइ रचेन्हि उपाऊ। भावी बस न जान कछु राऊ।।
English explanation
They devised a means by which their enemy would be destroyed; under the sway of destiny, the king knew nothing of it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिससे | by which |
| रिपु | शत्रु का | of the enemy |
| छय | नाश | destruction |
| सोइ | वही | that very |
| रचेन्हि | उन्होंने रचा | they devised |
| उपाऊ | उपाय | means; scheme |
| भावी | होनहार; नियति | destiny; what was to happen |
| बस | वश में | under the sway of |
| न | नहीं | not |
| जान | जानता था | knew |
| कछु | कुछ भी | anything |
| राऊ | राजा | the king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 173
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 172, 173
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।