बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते। गुर पद कमल पलोटत प्रीते।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे ही दोनों भाई मानो प्रेमसे जीते हुए प्रेमपूर्वक गुरुजीके चरणकमलोंको दबा रहे हैं। मुनिने बार-बार आज्ञा दी, तब श्रीरघुनाथजीने जाकर शयन किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 222 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते। गुर पद कमल पलोटत प्रीते।।
बारबार मुनि अग्या दीन्ही। रघुबर जाइ सयन तब कीन्ही।।
स्रोत अभिलेख 1.226 · पुस्तक पृ. 222, 222
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते। गुर पद कमल पलोटत प्रीते।।
English explanation
Those very two brothers, as though overcome by love, were lovingly massaging their teacher’s lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेइ | वे ही | those very |
| दोउ | दोनों | both |
| बंधु | भाई | brothers |
| प्रेम | प्रेम से | by love |
| जनु | मानो | as though |
| जीते | जीते हुए; वशीभूत | conquered; overcome |
| गुर | गुरु विश्वामित्र के | of their teacher Vishvamitra |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल | lotuses |
| पलोटत | दबा रहे थे | were massaging |
| प्रीते | प्रेमपूर्वक | lovingly |
2 बारबार मुनि अग्या दीन्ही। रघुबर जाइ सयन तब कीन्ही।।
English explanation
The sage repeatedly instructed him; then Rama went and lay down to rest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारबार | बार-बार | repeatedly |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र ने | the sage Vishvamitra |
| अग्या | आज्ञा | instruction |
| दीन्ही | दी | gave |
| रघुबर | रघुकुल के श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| जाइ | जाकर | having gone |
| सयन | शयन | lying down to rest |
| तब | तब | then |
| कीन्ही | किया | did |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.226
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 222
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 222, 222
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।