बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई। लगे चरन चापन दोउ भाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब श्रेष्ठ मुनिने जाकर शयन किया। दोनों भाई उनके चरण दबाने लगे जिनके चरणकमलोंके [दर्शन एवं स्पर्शके] लिये वैराग्यवान् पुरुष भी भाँति-भाँतिके जप और योग करते हैं,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 222 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई। लगे चरन चापन दोउ भाई।।
जिन्ह के चरन सरोरुह लागी। करत बिबिध जप जोग बिरागी।।
स्रोत अभिलेख 1.226 · पुस्तक पृ. 222, 222
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई। लगे चरन चापन दोउ भाई।।
English explanation
Then the venerable sage went and lay down, and both brothers began massaging his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि विश्वामित्र | the venerable sage Vishvamitra |
| सयन | शयन | lying down to rest |
| कीन्हि | किया | did |
| तब | तब | then |
| जाई | जाकर | having gone |
| लगे | लगे | began |
| चरन | मुनि के पैर | the sage’s feet |
| चापन | दबाने | to massage |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई राम और लक्ष्मण | brothers Rama and Lakshmana |
2 जिन्ह के चरन सरोरुह लागी। करत बिबिध जप जोग बिरागी।।
English explanation
For whose lotus feet renunciants undertake various forms of sacred recitation and yogic practice—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिनके—राम और लक्ष्मण के | whose—Rama and Lakshmana’s |
| के | के | of |
| चरन | चरण | feet |
| सरोरुह | कमल | lotuses |
| लागी | के लिए; पाने के निमित्त | for the sake of attaining |
| करत | करते हैं | undertake |
| बिबिध | विविध प्रकार के | various kinds of |
| जप | मंत्र या नाम का दोहराव | repetition of sacred formulas or names |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| बिरागी | वैराग्यवान साधक | renunciant practitioners |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.226
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 222
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 222, 222
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।