बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा। सबहीं संध्याबंदनु कीन्हा।।
मूल पाठ
निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा। सबहीं संध्याबंदनु कीन्हा।।
कहत कथा इतिहास पुरानी। रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी।।
स्रोत अभिलेख 1.226 · पुस्तक पृ. 222, 222
भावार्थ
मूल पाठ के बादरात्रिका प्रवेश होते ही (सन्ध्याके समय) मुनिने आज्ञा दी, तब सबने सन्ध्यावन्दन किया। फिर प्राचीन कथाएँ तथा इतिहास कहते-कहते सुन्दर रात्रि दो पहर बीत गयी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 222 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा। सबहीं संध्याबंदनु कीन्हा।।
English explanation
AI draft: As night fell, the sage gave permission, and everyone performed the evening prayers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसि | रात | night |
| प्रबेस | आगमन होने पर | upon the arrival of |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| दीन्हा | दी | gave |
| सबहीं | सभी ने | everyone |
| संध्याबंदनु | संध्याकालीन उपासना | evening ritual prayers |
| कीन्हा | की | performed |
2 कहत कथा इतिहास पुरानी। रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी।।
English explanation
While old stories and accounts of the past were recounted, two watches of the night passed pleasantly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | while recounting |
| कथा | कथाएँ | stories |
| इतिहास | अतीत के वृत्तांत | accounts of the past |
| पुरानी | पुरानी | old |
| रुचिर | आनंदपूर्ण | pleasant |
| रजनि | रात | night |
| जुग | दो | two |
| जाम | पहर | watches of the night |
| सिरानी | बीत गए | passed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.226
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 222
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 222, 222
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।