बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चापत चरन लखनु उर लाएँ। सभय सप्रेम परम सचु पाएँ।।
मूल पाठ
चापत चरन लखनु उर लाएँ। सभय सप्रेम परम सचु पाएँ।।
पुनि पुनि प्रभु कह सोवहु ताता। पौढ़े धरि उर पद जलजाता।।
स्रोत अभिलेख 1.226 · पुस्तक पृ. 222, 222
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके चरणोंको हृदयसे लगाकर भय और प्रेमसहित परम सुखका अनुभव करते हुए लक्ष्मणजी उनको दबा रहे हैं। प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने बार-बार कहा—हे तात! [अब] सो जाओ। तब वे उन चरणकमलोंको हृदयमें धरकर लेट रहे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 222 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चापत चरन लखनु उर लाएँ। सभय सप्रेम परम सचु पाएँ।।
English explanation
Lakshmana massaged Rama’s feet, holding them to his chest, and experienced supreme happiness with reverent awe and love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चापत | दबाते हुए | massaging |
| चरन | राम के चरण | Rama’s feet |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| उर | हृदय से; छाती से | to his heart; to his chest |
| लाएँ | लगाए हुए | holding close |
| सभय | आदरयुक्त भय या संकोच सहित | with reverent awe |
| सप्रेम | प्रेम सहित | with love |
| परम | अत्यंत; सर्वोच्च | supreme |
| सचु | सुख | happiness |
| पाएँ | पा रहे थे | were experiencing |
2 पुनि पुनि प्रभु कह सोवहु ताता। पौढ़े धरि उर पद जलजाता।।
English explanation
Lord Rama repeatedly said, ‘Sleep, dear brother.’ Lakshmana then lay down, holding Rama’s lotus feet to his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| कह | कहते हैं | says |
| सोवहु | सो जाओ | go to sleep |
| ताता | प्रिय भाई | dear brother |
| पौढ़े | लेट गए | lay down |
| धरि | रखकर; धारण करके | holding |
| उर | हृदय से | to his heart |
| पद | चरण | feet |
| जलजाता | कमल | lotuses |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.226
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 222
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 222, 222
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।