बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।
मूल पाठ
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।
तुम्ह गुर बिप्र धेनु सुर सेबी। तसि पुनीत कौसल्या देबी।।
स्रोत अभिलेख 1.294 · पुस्तक पृ. 278, 279
भावार्थ
मूल पाठ के बादवैसे ही सुख और सम्पत्ति बिना ही बुलाये स्वाभाविक ही धर्मात्मा पुरुषके पास जाती हैं। तुम जैसे गुरु, ब्राह्मण, गाय और देवताकी सेवा करनेवाले हो, वैसी ही पवित्र कौसल्या देवी भी हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 279 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।
English explanation
Likewise, happiness and wealth naturally come to a righteous person without being summoned.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिमि | वैसे ही | likewise |
| सुख | सुख | happiness |
| संपति | धन-संपत्ति | wealth |
| बिनहिं | बिना ही | even without |
| बोलाएँ | बुलाए | being summoned |
| धरमसील | धर्मशील व्यक्ति | a righteous person |
| पहिं | के पास | to |
| जाहिं | जाते हैं | come |
| सुभाएँ | स्वभावतः | naturally |
2 तुम्ह गुर बिप्र धेनु सुर सेबी। तसि पुनीत कौसल्या देबी।।
English explanation
You serve the guru, Brahmins, cows, and gods; Queen Kausalya is likewise pure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप, राजा दशरथ | you, King Dasharatha |
| गुर | गुरु | the guru |
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmins |
| धेनु | गायें | cows |
| सुर | देवता | gods |
| सेबी | सेवा करने वाले | one who serves |
| तसि | वैसी ही | likewise |
| पुनीत | पवित्र | pure |
| कौसल्या | कौसल्या, राम की माता | Kausalya, Rama’s mother |
| देबी | देवी; सम्मानित रानी | the honored queen |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.294
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 279
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 278, 279
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।