बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि बोले गुर अति सुखु पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई।।
मूल पाठ
सुनि बोले गुर अति सुखु पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई।।
जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.294 · पुस्तक पृ. 278, 279
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब समाचार सुनकर और अत्यन्त सुख पाकर गुरु बोले—पुण्यात्मा पुरुषके लिये पृथ्वी सुखोंसे छायी हुई है। जैसे नदियाँ समुद्रमें जाती हैं, यद्यपि समुद्रको नदीकी कामना नहीं होती॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 278 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि बोले गुर अति सुखु पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Hearing this, the guru spoke with great joy: happiness abounds on earth for a virtuous person.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बोले | बोले | said |
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the guru, Vasistha |
| अति | अत्यंत | very great |
| सुखु | सुख | joy |
| पाई | पाकर | having received |
| पुन्य | पुण्यवान | virtuous |
| पुरुष | व्यक्ति | person |
| कहुँ | के लिए | for |
| महि | पृथ्वी पर | on earth |
| सुख | सुख | happiness |
| छाई | छाया रहता है | prevails |
2 जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
English explanation
Just as rivers flow into the ocean, although it has no desire for them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| सरिता | नदियाँ | rivers |
| सागर | समुद्र | the ocean |
| महुँ | में | into |
| जाहीं | जाती हैं | flow |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| ताहि | उसे, समुद्र को | it, the ocean |
| कामना | इच्छा | desire |
| नाहीं | नहीं है | has none |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.294
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 278
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 278, 279
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।