बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बट तर करि कमलासन।।
मूल पाठ
तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बट तर करि कमलासन।।
संकर सहज सरुप सम्हारा। लागि समाधि अखंड अपारा।।
स्रोत अभिलेख 1.58 · पुस्तक पृ. 78, 79
भावार्थ
मूल पाठ के बादवहाँ फिर शिवजी अपनी प्रतिज्ञाको याद करके बड़के पेड़के नीचे पद्मासन लगाकर बैठ गये। शिवजीने अपना स्वाभाविक रूप सँभाला। उनकी अखण्ड और अपार समाधि लग गयी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 79 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बट तर करि कमलासन।।
English explanation
There Shiva, recalling his vow, sat beneath a banyan tree in the lotus posture.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| पुनि | फिर | then; again |
| संभु | शंभु; शिव | Shambhu, Shiva |
| समुझि | स्मरण करके | recalling |
| पन | प्रतिज्ञा | vow |
| आपन | अपनी | his own |
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| बट | बरगद | banyan tree |
| तर | के नीचे | beneath |
| करि | बनाकर; लगाकर | assuming |
| कमलासन | पद्मासन; कमल जैसी बैठने की मुद्रा | lotus sitting posture |
2 संकर सहज सरुप सम्हारा। लागि समाधि अखंड अपारा।।
English explanation
Shankara centered himself in his innate nature and entered an unbroken, boundless meditative absorption.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संकर | शंकर; शिव | Shankara, Shiva |
| सहज | स्वाभाविक; निज | innate; natural |
| सरुप | स्वरूप | essential nature |
| सम्हारा | स्मरण किया; उसमें चित्त स्थिर किया | recollected; centered himself in |
| लागि | लग गई | commenced; became established |
| समाधि | ध्यान की पूर्ण तल्लीन अवस्था | deep meditative absorption |
| अखंड | अटूट; अविच्छिन्न | unbroken |
| अपारा | असीम | boundless |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.58
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 79
- सहायक विषय
- शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
- मुद्रित पृष्ठ
- 78, 79
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।