बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया। रहे कीन्हि बिप्रन्ह पर दाया।।
मूल पाठ
तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया। रहे कीन्हि बिप्रन्ह पर दाया।।
भगति हेतु बहु कथा पुराना। कहे बिप्र जद्यपि प्रभु जाना।।
स्रोत अभिलेख 1.21 · पुस्तक पृ. 208, 209
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीने वहाँ कुछ दिन और रहकर ब्राह्मणोंपर दया की। भक्तिके कारण ब्राह्मणोंने उन्हें पुराणोंकी बहुत-सी कथाएँ कहीं, यद्यपि प्रभु सब जानते थे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 208 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया। रहे कीन्हि बिप्रन्ह पर दाया।।
English explanation
Rama then stayed there for a few days and showed kindness to the brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| पुनि | फिर | then |
| कछुक | कुछ | a few |
| दिवस | दिन | days |
| रघुराया | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| रहे | ठहरे | stayed |
| कीन्हि | की | showed |
| बिप्रन्ह | ब्राह्मणों | the brahmins |
| पर | पर | toward |
| दाया | दया | kindness |
2 भगति हेतु बहु कथा पुराना। कहे बिप्र जद्यपि प्रभु जाना।।
English explanation
Out of devotion, the sage recounted many stories from the Puranas, although the Lord already knew them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| हेतु | के कारण | because of |
| बहु | अनेक | many |
| कथा | कथाएँ | stories |
| पुराना | पुराणों की | from the Puranas |
| कहे | सुनाईं | recounted |
| बिप्र | ब्राह्मण मुनि विश्वामित्र ने | the brahmin sage Vishvamitra |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| जाना | जानते थे | knew |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 208
- सहायक विषय
- विश्वामित्र-यज्ञकी रक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 208, 209
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।