बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब मुनि सादर कहा बुझाई। चरित एक प्रभु देखिअ जाई।।
मूल पाठ
तब मुनि सादर कहा बुझाई। चरित एक प्रभु देखिअ जाई।।
धनुषजग्य मुनि रघुकुल नाथा। हरषि चले मुनिबर के साथा।।
स्रोत अभिलेख 1.21 · पुस्तक पृ. 208, 209
भावार्थ
मूल पाठ के बादतदनन्तर मुनिने आदरपूर्वक समझाकर कहा—हे प्रभो! चलकर एक चरित्र देखिये। रघुकुलके स्वामी श्रीरामचन्द्रजी धनुषयज्ञ [की बात] सुनकर मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्रजीके साथ प्रसन्न होकर चले॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 208 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तब मुनि सादर कहा बुझाई। चरित एक प्रभु देखिअ जाई।।
English explanation
Then the sage respectfully explained, ‘Lord, let us go and see an event.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मुनि | विश्वामित्र मुनि ने | the sage Vishvamitra |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| कहा | कहा | said |
| बुझाई | समझाकर | explaining |
| चरित | आयोजन | event |
| एक | एक | one |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| देखिअ | देखिए | please see |
| जाई | जाकर | having gone |
2 धनुषजग्य मुनि रघुकुल नाथा। हरषि चले मुनिबर के साथा।।
English explanation
Hearing of the bow ceremony, Rama, lord of Raghu’s lineage, joyfully set out with the eminent sage. Here ‘मुनि’ is uncertain; the reading ‘सुनि’ would make this sense clear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धनुषजग्य | धनुष-संबंधी यज्ञ या समारोह | bow sacrifice or ceremony |
| मुनि | सुनकर; धनुष-यज्ञ की बात सुनकर। | Having heard about the bow sacrifice. |
| रघुकुल | रघु के वंश के | of Raghu’s lineage |
| नाथा | स्वामी राम | the lord, Rama |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| चले | चल पड़े | set out |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि विश्वामित्र | the eminent sage Vishvamitra |
| के | के | with |
| साथा | साथ | in company |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 208
- सहायक विषय
- विश्वामित्र-यज्ञकी रक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 208, 209
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।