बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही। बिद्यानिधि कहुँ बिद्या दीन्ही।।
मूल पाठ
तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही। बिद्यानिधि कहुँ बिद्या दीन्ही।।
जाते लाग न छुधा पिपासा। अतुलित बल तनु तेज प्रकासा।।
स्रोत अभिलेख 1.209 · पुस्तक पृ. 207, 208
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब ऋषि विश्वामित्रने प्रभुको मनमें विद्याका भण्डार समझते हुए भी [लीलाको पूर्ण करनेके लिये] ऐसी विद्या दी, जिससे भूख-प्यास न लगे और शरीरमें अतुलित बल और तेजका प्रकाश हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 207 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही। बिद्यानिधि कहुँ बिद्या दीन्ही।।
English explanation
Then the sage recognized Rama in his heart as his own Lord, and imparted knowledge to Rama, the very treasury of knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रिषि | ऋषि विश्वामित्र ने | the sage Vishvamitra |
| निज | अपने | his own |
| नाथहि | स्वामी राम को | Lord Rama |
| जियँ | हृदय में | in his heart |
| चीन्ही | पहचान लिया | recognized |
| बिद्यानिधि | विद्या के भंडार राम | Rama, the treasury of knowledge |
| कहुँ | को | to |
| बिद्या | विद्या | knowledge |
| दीन्ही | प्रदान की | imparted |
2 जाते लाग न छुधा पिपासा। अतुलित बल तनु तेज प्रकासा।।
English explanation
Through that knowledge, hunger and thirst do not arise, and incomparable strength and radiance manifest in the body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाते | जिससे, उस विद्या से | through which, through that knowledge |
| लाग | लगती है | is felt |
| न | नहीं | not |
| छुधा | भूख | hunger |
| पिपासा | प्यास | thirst |
| अतुलित | अतुलनीय | incomparable |
| बल | शक्ति | strength |
| तनु | शरीर में | in the body |
| तेज | तेज, ओज | radiance and vigor |
| प्रकासा | प्रकट होता है | manifests |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.209
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 207
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 207, 208
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।