बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चले जात मुनि दीन्हि दिखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई।।
मूल पाठ
चले जात मुनि दीन्हि दिखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई।।
एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 1.209 · पुस्तक पृ. 207, 208
भावार्थ
मूल पाठ के बादमार्गमें चले जाते हुए मुनिने ताड़काको दिखलाया। शब्द सुनते ही वह क्रोध करके दौड़ी। श्रीरामजीने एक ही बाणसे उसके प्राण हर लिये और दीन जानकर उसको निजपद (अपना दिव्य स्वरूप) दिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 207 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चले जात मुनि दीन्हि दिखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई।।
English explanation
As they went along, the sage pointed out Tadaka. Hearing them, Tadaka rushed forward in anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चलते हुए | walking along |
| जात | जा रहे थे | were going |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र ने | the sage Vishvamitra |
| दीन्हि | कराया | gave |
| दिखाई | दर्शन; दिखाना | a sight; pointing out |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| ताड़का | राक्षसी ताड़का | the demoness Tadaka |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| करि | करके | having become |
| धाई | दौड़ी | rushed forward |
2 एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा।।
English explanation
Rama took her life with a single arrow. Regarding her as helpless, he granted her his own supreme state.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकहिं | एक ही | just one |
| बान | बाण से | with an arrow |
| प्रान | प्राण | life |
| हरि | हरकर | taking away |
| लीन्हा | ले लिए | took |
| दीन | दीन और असहाय | helpless and pitiable |
| जानि | जानकर | considering |
| तेहि | उसे, ताड़का को | to her, Tadaka |
| निज | अपना | his own |
| पद | परम पद | supreme state |
| दीन्हा | प्रदान किया | granted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.209
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 207
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 207, 208
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