बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्याम गौर सुंदर दोउ भाई। बिस्बामित्र महानिधि पाई।।
मूल पाठ
स्याम गौर सुंदर दोउ भाई। बिस्बामित्र महानिधि पाई।।
प्रभु ब्रह्मन्यदेव मै जाना। मोहि निति पिता तजेहु भगवाना।।
स्रोत अभिलेख 1.209 · पुस्तक पृ. 207, 208
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्याम और गौर वर्णके दोनों भाई परम सुन्दर हैं। विश्वामित्रजीको महान् निधि प्राप्त हो गयी। [वे सोचने लगे—] मैं जान गया कि प्रभु ब्रह्मण्यदेव (ब्राह्मणोंके भक्त) हैं। मेरे लिये भगवान्ने अपने पिताको भी छोड़ दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 207 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 स्याम गौर सुंदर दोउ भाई। बिस्बामित्र महानिधि पाई।।
English explanation
In obtaining the two beautiful brothers, dark-hued Rama and fair Lakshmana, Vishvamitra gained a great treasure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्याम | श्याम वर्ण वाले राम | dark-hued Rama |
| गौर | गौर वर्ण वाले लक्ष्मण | fair-hued Lakshmana |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| दोउ | दोनों | the two |
| भाई | भाई | brothers |
| बिस्बामित्र | ऋषि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| महानिधि | महान खजाना | a great treasure |
| पाई | प्राप्त किया | obtained |
2 प्रभु ब्रह्मन्यदेव मै जाना। मोहि निति पिता तजेहु भगवाना।।
English explanation
Lord, I recognized you as the deity who cherishes Brahmins. O Lord, you left your father for my sake—the reading ‘निति’ here is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे स्वामी | O Lord |
| ब्रह्मन्यदेव | ब्राह्मणों के हितकारी देव | the deity who cherishes Brahmins |
| मै | मैंने | I |
| जाना | पहचाना | recognized |
| मोहि | मेरे लिए | for me |
| निति | निमित्त; मेरे लिए, मेरी खातिर। | For my sake; on my account. |
| पिता | पिता को | your father |
| तजेहु | आपने छोड़ दिया | you left |
| भगवाना | हे भगवान | O Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.209
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 207
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 207, 208
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।