बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब बंदीजन जनक बौलाए। बिरिदावली कहत चलि आए।।
मूल पाठ
तब बंदीजन जनक बौलाए। बिरिदावली कहत चलि आए।।
कह नृप जाइ कहहु पन मोरा। चले भाट हियँ हरषु न थोरा।।
स्रोत अभिलेख 1.249 · पुस्तक पृ. 242, 243
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब राजा जनकने बंदीजनों (भाटों) को बुलाया। वे विरुदावली (वंशकी कीॢत) गाते हुए चले आये। राजाने कहा—जाकर मेरा प्रण सबसे कहो। भाट चले, उनके हृदयमें कम आनन्द न था॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 243 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब बंदीजन जनक बौलाए। बिरिदावली कहत चलि आए।।
English explanation
Then Janaka summoned the court bards; they approached reciting praises.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| बंदीजन | दरबारी स्तुतिगायक | court bards |
| जनक | राजा जनक ने | King Janaka |
| बौलाए | बुलाए | summoned |
| बिरिदावली | यशोगाथाओं की माला | a series of praises |
| कहत | कहते हुए | reciting |
| चलि | चलकर | walking |
| आए | आए | came |
2 कह नृप जाइ कहहु पन मोरा। चले भाट हियँ हरषु न थोरा।।
English explanation
The king said, ‘Go and announce my vow.’ The bards set off with great joy in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| नृप | राजा ने | the king |
| जाइ | जाकर | go and |
| कहहु | कहो; सुनाओ | announce |
| पन | प्रतिज्ञा | vow |
| मोरा | मेरी | my |
| चले | चल पड़े | set off |
| भाट | भाट; स्तुतिगायक | bards |
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषु | आनंद | joy |
| न | नहीं | not |
| थोरा | थोड़ा | little |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.249
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 243
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 242, 243
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